अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने ही देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों को ईरान के मामले में अनुभवहीन कहा है और उत्तर कोरिया को लेकर किए गए उनके आंकलन को भी ख़ारिज कर दिया है.
ट्रंप ने ट्वीट करके कहा, "ईरान से सावधान रहो. ख़ुफ़िया अधिकारियों को दोबारा स्कूल में जाना चाहिए. "
अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने वैश्विक सुरक्षा ख़तरों को लेकर किए अपने आंकलन में कहा था कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बना रहा है.
ट्रंप ने इसी से चिड़ कर ये प्रतिक्रिया दी है.
ख़ुफ़िया अधिकारियों ने अपने आंकलन में ये भी कहा था कि उत्तर कोरिया के अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने की संभावना नहीं है.
नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक डेन कोट्स और अन्य ख़ुफ़िया प्रमुखों ने मंगलवार को सीनेट के समक्ष अपनी द वर्ल्डवाइड थ्रेट एसेसमेंट रिपोर्ट (वैश्विक ख़तरों का आंकलन) पेश की थी.
बीते साल अमरीका साल 2015 में ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अलग हो गया था. राष्ट्रपति ट्रंप के इस फ़ैसले की न सिर्फ़ अमरीका बल्कि दुनियाभर में आलोचना हुई थी.
बीते साल ट्रंप ने उत्तर कोरिया के साथ राजनयिक रिश्ते बेहतर करने की दिशा में ठोस क़दम उठाते हुए उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ मुलाक़ात भी की थी.
इस मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि किम उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए सहमत हो गए हैं.
किम से मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि अब उत्तर कोरिया का परमाणु ख़तरा ख़त्म हो गया है. हालांकि कई विशेषज्ञों ने ट्रंप के इस दावे पर सवाल उठाए थे.
इस रिपोर्ट में रूस और चीन की ओर से होने वाले संभावित साइबर हमलों को लेकर भी चेताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दोनों ही देश साल 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशें कर सकते हैं.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया के नेता अपनी सत्ता के अस्तित्व के लिए विनाशकारी हथियारों को ज़रूरी मानते हैं और उत्तर कोरिया के अपने हथियार कार्यक्रम को समाप्त करने की संभावना नहीं है.
ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा है कि ईरान के ख़तरों के मामले में अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारी भोले हैं और ग़लत हैं.
ट्रंप ने कहा कि ईरान न सिर्फ़ मध्य पूर्व में बल्कि इसके बाहर भी परेशानी पैदा कर रहा है लेकिन अमरीका के 'बेकार ईरान समझौते' से अलग होने के बाद से वो काफ़ी बदल गया है.
हालांकि ट्रंप ने ये भी कहा कि ईरान अभी भी संभावित ख़तरों और संघर्ष का स्रोत बना हुआ है. उन्होंने हाल के दिनों में ईरान की ओर से दागे गए रॉकेटों का भी हवाला दिया.
सीनेट के समक्ष सीआईए की निदेशक गीना हास्पेल ने कहा था कि तकनीकी रूप से देखा जाए तो ईरान परमाणु समझौते का पालन कर रहा है.
अमरीका ने इस समझौते से अलग होकर ईरान पर और सख़्त प्रतिबंध लगाए हैं.
हालांकि इंटेलिजेंस रिपोर्ट में चेताया गया है कि ईरान की क्षेत्रीय महत्वकांक्षाएं और बेहतर सैन्य क्षमताएं भविष्य में अमरीकी हितों के लिए ख़तरा हो सकते हैं.
बीते साल भी ट्रंप को डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं की ओर से घोर आलोचना का सामना करना पड़ा था. उन्होंने 2016 अमरीकी चुनावों में रूसी दख़ल के आरोपों पर रूस का बचाव किया था.
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियां इस निष्कर्ष पर पहुंची थीं कि राष्ट्रपति चुनावों में रूस ने दख़ल दी. ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कहा था कि रूस चुनावों को डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के ख़िलाफ़ करने के प्रयास कर रहा था.
लेकिन जुलाई 2018 में हेल्सिंकी में रूसी राष्ट्रपति के साथ हुई सीधी मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि रूस के पास अमरीकी चुनावों में दख़ल देने की कोई वजह नहीं है.
हालांकि, आलोचना होने के 24 घंटे के भीतर ही उन्होंने अपने बयान से पलटने की कोशिश की थी.
अमरीका के विशेष जांच अधिकारी रॉबर्ट म्यूलर राष्ट्रपति चुनावों में रूसी दख़ल के आरोपों की स्वतंत्र जांच कर रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार ये कहते रहे हैं कि ये जांच उनसे बदला लेने की कोशिश है.
Wednesday, January 30, 2019
Tuesday, January 22, 2019
अमृता सिंह ने सारा अली ख़ान की डेट च्वाइस पर क्या कहा?
जब से सारा अली ख़ान ने करण जौहर के टॉक शो में यह कहा है कि वह कार्तिक आर्यन को डेट करना चाहती हैं तभी से ये दोनों ऐक्टर्स चर्चा में बने हुए हैं.
उसके बाद एक इवेंट पर रणवीर सिंह ने दोनों को मिलवाने की कोशिश की. अब तो कार्तिक आर्यन ने कॉफी डेट के लिए हाँ कर दी है.
एक इवेंट के दौरान जब कार्तिक आर्यन से पूछा गया कि सारा अली ख़ान से डेट से जुड़ी बात कहाँ तक पहुंची तो उन्होंने कहा, "मैं तो कॉफ़ी डेट के लिए तैयार हूँ. उन्हें बताना है कब और कहाँ. मैने सुना है उनकी मम्मी अमृता सिंह ने कहा है 'रुक जाओ और कार्तिक का रिएक्शन आने दो, बहुत हुआ'. मैं तैयार हूँ."
जहाँ सारा अली ख़ान की फ़िल्म 'सिम्बा' ने ख़ूब कमाई की है तो 'प्यार का पंचनामा' जैसी फ़िल्में कर चुके कार्तिक आर्यन भी 'सोनू के टीटू की स्वीटी' जैसी फ़िल्में दे चुके हैं.
दोनों ही फ़िल्मों ने 2018 में 100 करोड़ से ज़्यादा की कमाई की और कई लोगों को लगता है कि ये अगली पीढ़ी के स्टार होंगे.
अब कार्तिक आर्यन 'लुका छुप्पी' में काम कर रहे हैं जिसमें उनके साथ नज़र आ सकती हैं कृति सानोन.
करीना ने कभी मां बनने की कोशिश नहीं की
सारा अली ख़ान के बिंदास बात करने के तरीक़े ने बहुतों को इंप्रेस किया है. वो जितने भी इंटरव्यू देती हैं, दिल खोलकर बोलती हैं. चाहे वो कार्तिक आर्यन के बारे में अपने दिल की बात हो या करीना के बारे में कुछ कहना चाहती हों. वो कहती हैं कि उन्हें करीना से कोई प्रॉब्लम नहीं है.
सारा अली ख़ान ने कहा कि करीना ने कभी मां बनने की कोशिश नहीं की.
सारा अली ख़ान ने कहा, "मेरे पिताजी ने हमारे साथ ज़बरदस्ती नहीं की है और मेरी मां अमृता सिंह ने हमें बताया है कि वो ही मेरी मां हैं. साथ ही अगर करीना की बात है, अगर आपकी वजह से मेरे पिता ख़ुश हैं तो मैं खुश."
सारा कहती हैं, "वैसे तो करीना हर चीज़ बहुत अच्छे से करती हैं, लेकिन जो एक चीज़ मैं उनसे सीखना चाहती हूँ, वो है बैलेंस इन लाइफ़, इंशाअल्लाह एक दिन मैं ये ज़रूर सीखूंगी उनसे."
बचपन में सारा एक किरदार की फ़ैन थीं. वो था 'कभी ख़ुशी कभी ग़म' में करीना कपूर का किरदार 'पू'.
सारा ने दूर-दूर तक नहीं सोचा था कि एक दिन उनकी पसंदीदा 'पू' उनके पापा की दूसरी बीवी बनेंगी.
उसके बाद एक इवेंट पर रणवीर सिंह ने दोनों को मिलवाने की कोशिश की. अब तो कार्तिक आर्यन ने कॉफी डेट के लिए हाँ कर दी है.
एक इवेंट के दौरान जब कार्तिक आर्यन से पूछा गया कि सारा अली ख़ान से डेट से जुड़ी बात कहाँ तक पहुंची तो उन्होंने कहा, "मैं तो कॉफ़ी डेट के लिए तैयार हूँ. उन्हें बताना है कब और कहाँ. मैने सुना है उनकी मम्मी अमृता सिंह ने कहा है 'रुक जाओ और कार्तिक का रिएक्शन आने दो, बहुत हुआ'. मैं तैयार हूँ."
जहाँ सारा अली ख़ान की फ़िल्म 'सिम्बा' ने ख़ूब कमाई की है तो 'प्यार का पंचनामा' जैसी फ़िल्में कर चुके कार्तिक आर्यन भी 'सोनू के टीटू की स्वीटी' जैसी फ़िल्में दे चुके हैं.
दोनों ही फ़िल्मों ने 2018 में 100 करोड़ से ज़्यादा की कमाई की और कई लोगों को लगता है कि ये अगली पीढ़ी के स्टार होंगे.
अब कार्तिक आर्यन 'लुका छुप्पी' में काम कर रहे हैं जिसमें उनके साथ नज़र आ सकती हैं कृति सानोन.
करीना ने कभी मां बनने की कोशिश नहीं की
सारा अली ख़ान के बिंदास बात करने के तरीक़े ने बहुतों को इंप्रेस किया है. वो जितने भी इंटरव्यू देती हैं, दिल खोलकर बोलती हैं. चाहे वो कार्तिक आर्यन के बारे में अपने दिल की बात हो या करीना के बारे में कुछ कहना चाहती हों. वो कहती हैं कि उन्हें करीना से कोई प्रॉब्लम नहीं है.
सारा अली ख़ान ने कहा कि करीना ने कभी मां बनने की कोशिश नहीं की.
सारा अली ख़ान ने कहा, "मेरे पिताजी ने हमारे साथ ज़बरदस्ती नहीं की है और मेरी मां अमृता सिंह ने हमें बताया है कि वो ही मेरी मां हैं. साथ ही अगर करीना की बात है, अगर आपकी वजह से मेरे पिता ख़ुश हैं तो मैं खुश."
सारा कहती हैं, "वैसे तो करीना हर चीज़ बहुत अच्छे से करती हैं, लेकिन जो एक चीज़ मैं उनसे सीखना चाहती हूँ, वो है बैलेंस इन लाइफ़, इंशाअल्लाह एक दिन मैं ये ज़रूर सीखूंगी उनसे."
बचपन में सारा एक किरदार की फ़ैन थीं. वो था 'कभी ख़ुशी कभी ग़म' में करीना कपूर का किरदार 'पू'.
सारा ने दूर-दूर तक नहीं सोचा था कि एक दिन उनकी पसंदीदा 'पू' उनके पापा की दूसरी बीवी बनेंगी.
Thursday, January 10, 2019
क्या कमाल दिखाएंगे मोदी के तरकश से निकले ये तीर?
आगरा में आयोजित जनसभा में उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि अब तक लोग राजनीतिक दल चुनाव से पहले वादे किया करते थे लेकिन कोई भी इसके लिए गंभीर नहीं था. और उनकी सरकार ने गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करते हुए इस फ़ैसले को कानूनी जामा पहना दिया है.
आम चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे पर फ़ैसला करके बीजेपी ने ये बता दिया है कि वह आगामी चुनाव जीतने के लिए तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.
इससे पहले मोदी सरकार तीन तलाक, एनआरसी, राम मंदिर और भ्रष्टाचार विरोधी तमगे के दम पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर चुकी है.
पीएम मोदी ने आगरा में रैली के दौरान लोगों को ज़ोर-शोर से ये बताने की कोशिश की कि इस मुद्दे को लेकर पूर्ववर्ती सरकारें गंभीर नहीं थीं लेकिन उनकी सरकार ने गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करते सामान्य वर्ग के गरीबों को ये आरक्षण दिया.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसा करते हुए वंचित और शोषित वर्गों का हक़ नहीं छीना है.
जब राजनीतिक विश्लेषक राधिका रामाशेषन से ये सवाल किया गया कि बीजेपी इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ कैसे ले पाएगी तो उन्होंने कहा कि ये फ़ैसला चुनाव के मैदान में भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित होगा.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के साथ बातचीत में वह कहती हैं, "बीजेपी सरकार को हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हुआ है. नोटबंदी और जीएसटी जैसे तमाम मुद्दों के चलते इन्हें सामान्य वर्ग के वोट नहीं मिले और छात्रों ने बेरोजगारी के चलते इन्हें नकार दिया. इसके बाद इन्हें लगा कि सामान्य वर्ग को आरक्षण देकर ये अपने से दूर जाते सामान्य वर्ग को भी संभाल लेंगे और दूसरे तबकों को भी अपने करीब ले आएंगे."
"आम चुनाव की बात करें तो बीजेपी को इस फैसले से फायदा ज़रूर मिलेगा क्योंकि बीजेपी प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर पार्टी है"
अगर राम मंदिर मुद्दे की बात करें तो बीजेपी ने फिलहाल इस मुद्दे पर किसी तरह की बयानबाजी से खुद को दूर रखा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हालिया इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार राम मंदिर के मुद्दे पर कोई फ़ैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लेना चाहेगी.
लेकिन मोदी सरकार के पास कोई मजबूत फ़ैसला लेने के लिए ज़्यादा समय नहीं है. क्योंकि मार्च से पहले ही अगले चुनावों के लिए आचार संहिता लागू हो जाएगी.
आगामी दस जनवरी को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. और अगर कोर्ट में ये सुनवाई लगातार नहीं चलती है तो इसका फ़ैसला आम चुनाव से पहले आने के संकेत नहीं मिलते हैं.
और मार्च में आचार संहिता लागू होने के बाद मोदी सरकार राम मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश नहीं ला पाएगी. ऐसे में वक्त ही बताएगा कि बीजेपी को इससे कितना फायदा मिल पाएगा.
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह से लेकर पार्टी के तमाम नेता बीते काफ़ी समय से इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रहे हैं.
अमित शाह जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कह चुके हैं कि सिटिज़न रजिस्टर बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया और पहली सूची में 40 लाख लोग संदिग्ध पाए गए हैं.
इससे पहले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी कह चुके हैं कि देश के बाकी हिस्सों में भी एनआरसी लागू की जानी चाहिए, जिससे देश में दाखिल हो गए घुसपैठियों को पहचान कर बाहर निकाला जा सके.
आम चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे पर फ़ैसला करके बीजेपी ने ये बता दिया है कि वह आगामी चुनाव जीतने के लिए तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.
इससे पहले मोदी सरकार तीन तलाक, एनआरसी, राम मंदिर और भ्रष्टाचार विरोधी तमगे के दम पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर चुकी है.
पीएम मोदी ने आगरा में रैली के दौरान लोगों को ज़ोर-शोर से ये बताने की कोशिश की कि इस मुद्दे को लेकर पूर्ववर्ती सरकारें गंभीर नहीं थीं लेकिन उनकी सरकार ने गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करते सामान्य वर्ग के गरीबों को ये आरक्षण दिया.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसा करते हुए वंचित और शोषित वर्गों का हक़ नहीं छीना है.
जब राजनीतिक विश्लेषक राधिका रामाशेषन से ये सवाल किया गया कि बीजेपी इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ कैसे ले पाएगी तो उन्होंने कहा कि ये फ़ैसला चुनाव के मैदान में भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित होगा.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के साथ बातचीत में वह कहती हैं, "बीजेपी सरकार को हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हुआ है. नोटबंदी और जीएसटी जैसे तमाम मुद्दों के चलते इन्हें सामान्य वर्ग के वोट नहीं मिले और छात्रों ने बेरोजगारी के चलते इन्हें नकार दिया. इसके बाद इन्हें लगा कि सामान्य वर्ग को आरक्षण देकर ये अपने से दूर जाते सामान्य वर्ग को भी संभाल लेंगे और दूसरे तबकों को भी अपने करीब ले आएंगे."
"आम चुनाव की बात करें तो बीजेपी को इस फैसले से फायदा ज़रूर मिलेगा क्योंकि बीजेपी प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर पार्टी है"
अगर राम मंदिर मुद्दे की बात करें तो बीजेपी ने फिलहाल इस मुद्दे पर किसी तरह की बयानबाजी से खुद को दूर रखा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हालिया इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार राम मंदिर के मुद्दे पर कोई फ़ैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लेना चाहेगी.
लेकिन मोदी सरकार के पास कोई मजबूत फ़ैसला लेने के लिए ज़्यादा समय नहीं है. क्योंकि मार्च से पहले ही अगले चुनावों के लिए आचार संहिता लागू हो जाएगी.
आगामी दस जनवरी को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. और अगर कोर्ट में ये सुनवाई लगातार नहीं चलती है तो इसका फ़ैसला आम चुनाव से पहले आने के संकेत नहीं मिलते हैं.
और मार्च में आचार संहिता लागू होने के बाद मोदी सरकार राम मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश नहीं ला पाएगी. ऐसे में वक्त ही बताएगा कि बीजेपी को इससे कितना फायदा मिल पाएगा.
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह से लेकर पार्टी के तमाम नेता बीते काफ़ी समय से इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रहे हैं.
अमित शाह जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कह चुके हैं कि सिटिज़न रजिस्टर बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया और पहली सूची में 40 लाख लोग संदिग्ध पाए गए हैं.
इससे पहले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी कह चुके हैं कि देश के बाकी हिस्सों में भी एनआरसी लागू की जानी चाहिए, जिससे देश में दाखिल हो गए घुसपैठियों को पहचान कर बाहर निकाला जा सके.
Friday, January 4, 2019
एच एस फूलका ने आम आदमी पार्टी छोड़ी
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और वकील एच एस फूलका ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है. फूलका पिछले तीन दशकों से कोर्ट में 1984 के सिख विरोधी दंगों के केस लड़ रहे थे.
फूलका ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को अपना इस्तीफ़ा सौंपा.
उन्होंने ख़ुद ट्वीट कर अपने इस्तीफ़े की जानकारी दी और कहा कि वह इस मामले में शुक्रवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कारण बताएंगे.
फूलका ने ट्वीट किया, "मैंने आम आदमी पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है और अपना इस्तीफ़ा केजरीवाल जी को सौंप दिया है. हालाँकि उन्होंने मुझे इस्तीफ़ा नहीं देने को कहा, लेकिन मैंने इस्तीफ़े पर ज़ोर दिया. मैं कल शाम चार बजे दिल्ली के प्रेस क्लब में पार्टी छोड़ने के कारणों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताऊंगा."
फूलका मार्च 2017 में पंजाब में विपक्ष के नेता बने थे, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पद से यह कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था कि वह 1984 के मामलों पर फ़ोकस करना चाहते हैं.
फूलका का इस्तीफ़ा ऐसे समय में हुआ है जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच 2019 के लोकसभा चुनावों में गठबंधन की बातें चल रही थी, हालाँकि गुरुवार को ही पार्टी के नेता संजय सिंह ने साफ़ किया था कि उनकी पार्टी किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी.
कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने सिख दंगों के एक मामले में दोषी ठहराया था और उन्हें उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. सज्जन कुमार को कोर्ट ने 31 दिसंबर तक समर्पण करने को कहा था.
इसके बाद सज्जन कुमार ने कोर्ट से 31 जनवरी तक का समय मांगा था, लेकिन अपील ख़ारिज होने के बाद उन्होंने दिल्ली की एक अदालत में समर्पण कर दिया था.
दिल्ली विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की मांग संबंधी प्रस्ताव पारित होने पर विवाद हुआ था, हालांकि बाद में आम आदमी पार्टी ने इससे इनकार कर दिया था.
पार्टी का कहना था कि सदन में जो प्रस्ताव पारित किया गया, उसमें राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने का ज़िक्र नहीं था.
फूलका ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को अपना इस्तीफ़ा सौंपा.
उन्होंने ख़ुद ट्वीट कर अपने इस्तीफ़े की जानकारी दी और कहा कि वह इस मामले में शुक्रवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कारण बताएंगे.
फूलका ने ट्वीट किया, "मैंने आम आदमी पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है और अपना इस्तीफ़ा केजरीवाल जी को सौंप दिया है. हालाँकि उन्होंने मुझे इस्तीफ़ा नहीं देने को कहा, लेकिन मैंने इस्तीफ़े पर ज़ोर दिया. मैं कल शाम चार बजे दिल्ली के प्रेस क्लब में पार्टी छोड़ने के कारणों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताऊंगा."
फूलका मार्च 2017 में पंजाब में विपक्ष के नेता बने थे, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पद से यह कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था कि वह 1984 के मामलों पर फ़ोकस करना चाहते हैं.
फूलका का इस्तीफ़ा ऐसे समय में हुआ है जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच 2019 के लोकसभा चुनावों में गठबंधन की बातें चल रही थी, हालाँकि गुरुवार को ही पार्टी के नेता संजय सिंह ने साफ़ किया था कि उनकी पार्टी किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी.
कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने सिख दंगों के एक मामले में दोषी ठहराया था और उन्हें उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. सज्जन कुमार को कोर्ट ने 31 दिसंबर तक समर्पण करने को कहा था.
इसके बाद सज्जन कुमार ने कोर्ट से 31 जनवरी तक का समय मांगा था, लेकिन अपील ख़ारिज होने के बाद उन्होंने दिल्ली की एक अदालत में समर्पण कर दिया था.
दिल्ली विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की मांग संबंधी प्रस्ताव पारित होने पर विवाद हुआ था, हालांकि बाद में आम आदमी पार्टी ने इससे इनकार कर दिया था.
पार्टी का कहना था कि सदन में जो प्रस्ताव पारित किया गया, उसमें राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने का ज़िक्र नहीं था.
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