आगरा में आयोजित जनसभा में उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि अब तक लोग राजनीतिक दल चुनाव से पहले वादे किया करते थे लेकिन कोई भी इसके लिए गंभीर नहीं था. और उनकी सरकार ने गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करते हुए इस फ़ैसले को कानूनी जामा पहना दिया है.
आम चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे पर फ़ैसला करके बीजेपी ने ये बता दिया है कि वह आगामी चुनाव जीतने के लिए तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.
इससे पहले मोदी सरकार तीन तलाक, एनआरसी, राम मंदिर और भ्रष्टाचार विरोधी तमगे के दम पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर चुकी है.
पीएम मोदी ने आगरा में रैली के दौरान लोगों को ज़ोर-शोर से ये बताने की कोशिश की कि इस मुद्दे को लेकर पूर्ववर्ती सरकारें गंभीर नहीं थीं लेकिन उनकी सरकार ने गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करते सामान्य वर्ग के गरीबों को ये आरक्षण दिया.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसा करते हुए वंचित और शोषित वर्गों का हक़ नहीं छीना है.
जब राजनीतिक विश्लेषक राधिका रामाशेषन से ये सवाल किया गया कि बीजेपी इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ कैसे ले पाएगी तो उन्होंने कहा कि ये फ़ैसला चुनाव के मैदान में भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित होगा.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के साथ बातचीत में वह कहती हैं, "बीजेपी सरकार को हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हुआ है. नोटबंदी और जीएसटी जैसे तमाम मुद्दों के चलते इन्हें सामान्य वर्ग के वोट नहीं मिले और छात्रों ने बेरोजगारी के चलते इन्हें नकार दिया. इसके बाद इन्हें लगा कि सामान्य वर्ग को आरक्षण देकर ये अपने से दूर जाते सामान्य वर्ग को भी संभाल लेंगे और दूसरे तबकों को भी अपने करीब ले आएंगे."
"आम चुनाव की बात करें तो बीजेपी को इस फैसले से फायदा ज़रूर मिलेगा क्योंकि बीजेपी प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर पार्टी है"
अगर राम मंदिर मुद्दे की बात करें तो बीजेपी ने फिलहाल इस मुद्दे पर किसी तरह की बयानबाजी से खुद को दूर रखा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हालिया इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार राम मंदिर के मुद्दे पर कोई फ़ैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लेना चाहेगी.
लेकिन मोदी सरकार के पास कोई मजबूत फ़ैसला लेने के लिए ज़्यादा समय नहीं है. क्योंकि मार्च से पहले ही अगले चुनावों के लिए आचार संहिता लागू हो जाएगी.
आगामी दस जनवरी को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. और अगर कोर्ट में ये सुनवाई लगातार नहीं चलती है तो इसका फ़ैसला आम चुनाव से पहले आने के संकेत नहीं मिलते हैं.
और मार्च में आचार संहिता लागू होने के बाद मोदी सरकार राम मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश नहीं ला पाएगी. ऐसे में वक्त ही बताएगा कि बीजेपी को इससे कितना फायदा मिल पाएगा.
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह से लेकर पार्टी के तमाम नेता बीते काफ़ी समय से इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रहे हैं.
अमित शाह जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कह चुके हैं कि सिटिज़न रजिस्टर बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया और पहली सूची में 40 लाख लोग संदिग्ध पाए गए हैं.
इससे पहले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी कह चुके हैं कि देश के बाकी हिस्सों में भी एनआरसी लागू की जानी चाहिए, जिससे देश में दाखिल हो गए घुसपैठियों को पहचान कर बाहर निकाला जा सके.
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